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पहला सुख निरोगी काया

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आयुर्वेद की परिकल्पना है कि यद्यपि रोगों की संख्या असीमित हो सकती है परंतु उनके उपचार में उनके प्राथमिक कारणों पर ध्यान देकर उन्हें अच्छी तरह से ठीक किया जा सकता है। इसलिए हम आयुर्वेद की मदद से जटिल एवं गंभीर बीमारियों से लड़ सकते हैं और जीत सकते हैं। ऐसी कई जटिल बीमारियां हैं जिन्हें आयुर्वेद पंचकर्म रसायन और औषधियों की मदद से सफलतापूर्वक प्रबंधित किया जा सकता है। पुरानी बीमारियों के उदाहरण में अल्जाइमर रोग, गठिया, अस्थमा, कैंसर ,मधुमेह ,हृदय रोग ,पार्किंसन और कई ऑटोइम्यून रोग हैं।
आयुर्वेद चिकित्सा में आम अर्थात ऑटोटॉक्सिन की पहचान की गई है ।आम को खराब स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार माना गया है ।शरीर में इसका संचय लंबे समय से चल रहे अनुचित आहार, विहार, अत्यधिक केमिकल युक्त दवाओं का सेवन, मौसमी बदलाव ,और बढ़ती उम्र के कारण होता है। आम का उत्पादन बड़ी आंतों में विघटित भोजन के लंबे समय तक संचय के कारण होता है। परिणाम स्वरूप पाचन एंजाइम ठीक से काम करना बंद कर देते हैं और पूरा पाचन तंत्र प्रभावित हो जाता है ।यह आम शरीर के विभिन्न चैनलों में फेल कर और वहां रुक जाने की वजह से ऊर्जा का प्रवाह में हस्तक्षेप करता है जो की बीमारियों का मूल कारण माना गया है। वास्तव में किसी भी बीमारी के पहले चरण को “आम अवस्था” कहा जा सकता है जिस का संस्कृत में अर्थ होता है बिना बचा हुआ या बिना पका हुआ।
इसलिए उपयुक्त आहार और जीवन शैली में बदलाव से आम से मुक्ति पाई जा सकती है। गहरे उसको अंगों और चैनलों से विषाक्त पदार्थों के उन्मूलन को डिटॉक्स या पंचकर्म के माध्यम से ठीक किया जा सकता है इसलिए आयुर्वेद उपचार को आजमाएं और शरीर को निरोगी बनाएं।

Dr. Vandana Dammani
Aarogyam Ayurved Clinic
Bharuch
9913701423

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